https://digitallocker.gov.in/ 
अब आपको अपने important documents  साथ लेकर घूमने की जरूरत नही है।

 इसके लिए सरकार ने Digital Locker लांच कर दिया है।   जहां आप जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, शैक्षणिक प्रमाण पत्र जैसे अहम दस्तावेजों को ऑनलाइन स्टोर कर सकते हैं।

यह सुविधा पाने के लिए बस आपके पास आधार कार्ड होना चाहिए।
आधार का नंबर फीड कर आप DIGITAL LOCKER अकाउंट खोल सकते हैं।


 इस सुविधा की खास बात ये है कि एक बार लॉकर में अपने DOCUMENTS अपलोड करने के बाद आपको कहीं भी अपने सर्टिफिकेट की मूल कॉपी देने की जरूरत नहीं होगा। इसके लिए आपके DIGITAL LOCKER का लिंक ही काफी होगा।

DIGITAL LOCKER , प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया प्रोग्राम का अहम हिस्सा है।

डिपार्टमेंट ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (डीईआईटीवाई) ने  डिजिटल लॉकर का बीटा वर्जन लॉन्च किया है।


कैसे मिलेगा  :

 digital locker को खोलने के लिए आपको  https://digitallocker.gov.in/   वेबसाइट पर जाकर अपनी आईडी बनानी होगी। आईडी बनाने के लिए आपको अपना आधार कार्ड नंबर से लॉगिन करना होगा।

लॉगिन होने के बाद आपसे जो इन्फॉर्मेंशन मांगी जाए उसे भरें। इसके बाद आपका अकाउंट बन जाएगा। अकाउंट खुलने के बाद आप कभी भी इस पर अपने पर्सनल डॉक्युमेंट्स अपलोड कर सकेंगे।


क्या है खासियत ?

DIGITAL LOCKER की खासियत ये है कि आप कहीं भी और कभी भी अपने डॉक्युमेंट्स इसके जरिए जमा कर सकते हैं।

 डिजिटल लॉकर स्कीम में हर भारतीय एजुकेशनल, मेडिकल, पासपोर्ट और पैन कार्ड डिटेल्स को डिजिटल फॉर्म में रख सकता है।

 वेबसाइट में कहा गया है, 'डिजिटल लॉकर अधिकृत उपभोक्ताओं/ एजेंसियों को किसी भी समय और कहीं भी अपने दस्तावेजों को सुरक्षित तरीके से अपलोड और साझा करने की सहूलियत देंगे।' 👍

 विण्‍डोज का एक बहुत काम का सीक्रेट सॉफ्टवेयर
 Windows 7 में एक बहुत Secret software है, इसका नाम है Problem Steps Recorder

 How To Use Problem Steps Recorder Windows 7, Windows 8
 Windows 7  में Start बटन पर Click कीजिये और Search Box में PSR टाइप कीजिये और Enter कीजिये या Windows + R दबाइये और PSR टाइप कीजिये। इससे Problem Steps Recorder ओपन हो जायेगा।
 यह  Software छोटा लेकिन बहुत Powerful है, इसमें तीन बटन हाेते हैं -

1- Start Record 2- Stop Record  और 3- Add Comment

कैसे काम करता है - How it Works
जैसे ही आप Start Record का बटन दबायेगें वैसे ही यह आपके द्वारा किये जा रहे हर काम को Stap by Stap automatically capture करना शुरू कर देगा, आप जहॉ भी माउस  से क्लिक या की-बोर्ड से टाइप  करेगें, आपका हर स्‍टैप एक Screen shot ले लिया जायेगा और एक RAR /Zip File में Save किया जायेगा, Stop Record का बटन दबाते ही RAR/Zip File आपके Desktop पर Save हो जायेगी। इसको कीजिये Extract अौर Extract हुई File को Internet explorer में Open कीजिये। आपकी PC Guide तैयार हो जायेगी। जिसमें आपका हर स्‍टैप Record हो जायेगा। वह भी Screen shot के साथ। अब आपको जिसकी भी मदद करनी हो तो आप उस व्‍यक्ति यह File को ई मेल के माध्‍यम से भेज सकते हो।


Solar system
The Sun and planets of the Solar System
(sizes but not distances are to scale).

भारत के पहले उपग्रह का नाम आर्यभट्ट रखा गया | गणित और खगोलशास्त्र (Astronomy) के महान विद्वान आर्यभट्ट का जन्म 476 A.D. में केरल में हुआ |
नालंदा विश्वविद्यालय में इन्होंने अध्यन किया, इनकी प्रतिभा को गुप्त सम्राट बुद्धगुप्त ने पहचाना अ विश्वविद्यालय प्रमुख की उपाधी दी | आर्यभट्ट ने सर्वप्रथम बताया कि प्रथ्वी गोल है तथा अपने अक्ष पर घूमती है जिससे दिन व रात होते हैं | चंद्रमा सूर्य की रोशनी के चमकता है एवं चंद्रग्रहण व सूर्यग्रहण के रहस्यों को भी समझाया | विश्व पहली बार पाई का मान 3.1416 होता है, आर्यभट्ट ने ज्ञात किया तथा इन्होंने गणित के विभिन्न समीकरणों को  हल करने के तरीके भी बताये जिसे पूरे विश्व ने स्वीकार किया है |

इन्होंने आर्यभट्ट सिन्धातम नाम से एक पुस्कत भी लिखी जिसके कुछ फैक्ट इस प्रकार है –  

सूर्य से ग्रहों की दूरी को  Astronomical Unit में दर्शाया गया है | जो प्रथ्वी व सूर्य के बीच की औसत दूरी है |
11 Astronomical Unit = 149 597 871 kilometers

गृह का नाम   
आर्यभट्ट के अनुसार
(सूर्य से दूरी)
आधुनिक मत के अनुसार (सूर्य से दूरी)
Mercury
0.375
0.387
Venus
0.725
0.723
Mars
1.538
1.523
Jupiter
5.16
5.20
Saturn
9.41
9.54


विभिन्न ग्रहों का सूर्य के चारो ओर परिभ्रमण काल सिद्धांत –


गृह का नाम
आर्यभट्ट के अनुसार

आधुनिक मत के अनुसार
Earth
365.25787
365.256
Moon (satellite planet)
27.322 Day (orbit around Earth)
27.322 Day
Mars
1.881 Year
0.723
Jupiter
5.16
5.20
Saturn
9.41
9.54







हम जानते हैं, भारत ने सदा विश्व को सदा कुछ न कुछ दिया है | गणित के क्षेत्र में भारत का विश्व में बहुत योगदान रहा है | हम जानते हैं कि ‘0’ विश्व को भारत की देन है जिसका उल्लेख प्राचीनतम उल्लेख चंद्रा शास्त्र में मिलता है जिसे 200 BC में पिंगला ऋषि ने लिखा था |

संस्कृत के महा विद्वान गणिनी द्वारा रचित शास्त्रों में भी ‘0’ के लिए वैज्ञानिक कहत्ते है, कि रोमन व अरब सभ्यताओं ने शून्य के महत्व को भारत से लिया, पहले अरब लोगों ने इसे सीखा, फिर यूरोप को सिखाया | अलबरुनी (Al-Biruni) व अबुल अबुरहमान जिन्होंने 973 A.D.  में भारत की यात्रा की तथा भारतीय ज्ञान को अरब फिर यूरोप तक पहुचाया | Place value system भी भारत की देन है | 3000 B.C. से लेकर 12 A.D. तक गणित के क्षेत्र में भारत ने अमूल्य योगदान दिया | हड़प्पा एवं वैदिक काल में सुलभ सूत्र ज्यामिति (Geometry) तथा Pythagorean theorem ( Baudhyana theorem) का उपयोग triangle , equilateral triangle , right triangle की गणनाओं के काम आत्ती थी | 
बहुत सारे भारतीय गणतज्ञ जैसे Arybhata, Brahmagupta, Mahavira, Bhaskara II ने गणित के क्षेत्र में योगदान दिया | 
भारत में Srinivasa Ramanujan जैसे गणित के विद्वान हुए जिन्होंने ने स्नातक न होते हुए भी Cambridge University में पढ़ाया |  
Aryabhata, mathematician and astronomer in Ancient India.

Learn full Indian math free
On January- February 2015 I was in West Bengal, visited many places sharing video with you  


English version for this video


A famous mathematician, Gauss.  In elementary school in the late 1700’s, Gauss was asked to find the sum of the numbers from 1 to 100.  The question was assigned as “busy work” by the teacher, but Gauss found the answer rather quickly by discovering a pattern.  His observation was as follows:
1 + 2 + 3 + 4 + … + 98 + 99 + 100
Gauss noticed that if he was to split the numbers into two groups (1 to 50 and 51 to 100), he could add them together vertically to get a sum of 101.
1     + 2   + 3   + 4   + 5   + … + 48 + 49 + 50
100 + 99 + 98 + 97 + 96 + … + 53 + 52 + 51
1 + 100 = 101
2 + 99 = 101
3 + 98 = 101
.
.
.
48 + 53 = 101
49 + 52 = 101
50 + 51 = 101
Gauss realized then that his final total would be 50(101) = 5050.
The sequence of numbers (1, 2, 3, … , 100) is arithmetic and when we are looking for the sum of a sequence, we call it a series.  Thanks to Gauss, there is a special formula we can use to find the sum of a series:
       
S is the sum of the series and n is the number of terms in the series, in this case, 100.



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1. बीकाजी का जन्म 5 अगस्त 1438 में जोधपुर में हुवा! इनके पिता राव जोधा व माता रानी नौरंगदे थी!
2. आसोज सुदी 10, संवत 1522, सन 1465 को बीकाजी ने जोधपुर से कूच किया तथा पहले मण्डोर पहुंचे !
3. राव बीका ने दस वर्ष तक भाटियों का मुकाबला किया मगर कुछ लाभ नहीं होता देख संवत 1442 में वर्तमान बीकानेर में आगये!
4. बीकानेर का पुराना नाम "जांगळ प्रदेश ", तथा "विक्रमाखण्ड", "विक्रम नगर" या " विक्रम पुरी" था !
5. बीकाजी की शादी करणी माता की उपस्थिति में पूगल के राव शेखा भाटी की पुत्री " रंगकंवर " के साथ हुई !
6. बीकाजी ने करणी माता के हाथों विक्रम संवत 1542 में वर्तमान लक्ष्मीनाथ मन्दिर के पास बीकानेर के प्रथम किले की नींव रखी ! जिसका प्रवेशोत्सव संवत 1545, वैशाख सुदी 2, शनिवार को मनाया गया!
7. बीकाजी की मृत्यु आसोज सुदी 3 संवत 1561, सन् 1504 को हुई!
8. बीकानेर में राव बीकाजी से लेकर महाराजा नरेन्द्र सिंह तक कुल 24 शासक हुवे!
9. महाराजा प्रताप सिंह बीकानेर के सबसे कम उम्र के शासक बने, जब ये शासक बने तब इनकी आयु मात्र 6 वर्ष की थी !
10. महाराजा दलपत सिंह जी सबसे अधिक आयु के शासक बने, जब शासक बने तब इनकी आयु 46 वर्ष, 11 माह थी!
11. बीकानेर पर सबसे कम समय तक राज करने वाले "महाराजा राजसिह " थे जिन्होंने सिर्फ 21 दिन राज किया!
12. बीकानेर में सबसे अधिक समय तक राज महाराजा गंगासिंह जी ने किया, इनका कार्यकाल 55 वर्ष, 5 माह और 2 दिन रहा !
13. बीकानेर का जूनागढ़ संवत 1645 में बनना शुरू हुआ और संवत 1650 में बन कर तैयार हुवा, जिसे महाराजा रायसिंह ने बनवाया था! जिसका जिम्मा महाराजा ने अपने दिवान करमचन्द बच्छावत को सौंपा था! जो बाद में रायसिंह से बगावत कर अकबर के साथ मिल गया था!
14. जूनागढ़ किले की परिधि 1078 गज है ! परकोटे की दिवारें 14.5 फुट चौड़ी तथा 40 फुट ऊंची है !
15. बीकानेर में सर्व प्रथम सिक्के ( मुद्रा ) सन् 1446-87 में महाराजा गजसिंह ने ढलवाये! यह कार्य महाराजा डूंगरसिंह जी तक जारी रहा, फिर बन्द होगया!
16. बीकानेर में सर्व प्रथम रेल 9 दिसम्बर सन् 1898 को " चीलो " से बीकानेर तक चली, जिसकी लम्बाई 47.75 मील थी!
17. बीकानेर में 5 दरवाजे है,
(1) कोट गेट, (2) जस्सुसर गेट, (3) नत्थुसर गेट, (4) गोगा गेट तथा शीतला गेट! वर्तमान में (6) विश्वकर्मा गेट और बन गया है !
18. बीकानेर में 6 बारी (छोटे दरवाजे ) है
(1) ईदगाह बारी (जिसे वर्तमान में "धर्म नगर द्वार " कहते हैं, (2) बेणीसर बारी, (3) पाबू बारी, (4) कसाई बारी, (5) हमालों की बारी तथा (6) पाबू बारी है! वर्तमान में कुच्छेक और बन गई है!
19. गोगा गेट रो पहले दिल्ली का दरवाजा कहते थे, जिसकी स्थापना 12 अगस्त 1738 को हुई !
20. जस्सुसर गेट को पहले " यशवंत सागर दरवाजा " कहते थे, ( पुरातन विभाग में इसका उल्लेख " जसवंत गेट" के नाम से मिलता हैं!
21. नत्थुसर गेट का नाम पहले " गणेश दरवाजा " था !
22. "जंगलधर शाह (जंगलधर बादशाह की उपाधी तत्कालीन राजपूत राजाओं ने बीकानेर के बादशाह करणसिंह को दी थी!
23. सन् 1896 में पलाना के पास बरसिंहसर गांव में कोयला होने का पता चला!
यह सारी जानकारी जिन पुस्तकों से ली गयी हैं वो निम्न है :-
तवारीख़ बीकानेर, बीकानेर राज्य का इतिहास, बीकानेर का इतिहास|