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Solar system
The Sun and planets of the Solar System
(sizes but not distances are to scale).

भारत के पहले उपग्रह का नाम आर्यभट्ट रखा गया | गणित और खगोलशास्त्र (Astronomy) के महान विद्वान आर्यभट्ट का जन्म 476 A.D. में केरल में हुआ |
नालंदा विश्वविद्यालय में इन्होंने अध्यन किया, इनकी प्रतिभा को गुप्त सम्राट बुद्धगुप्त ने पहचाना अ विश्वविद्यालय प्रमुख की उपाधी दी | आर्यभट्ट ने सर्वप्रथम बताया कि प्रथ्वी गोल है तथा अपने अक्ष पर घूमती है जिससे दिन व रात होते हैं | चंद्रमा सूर्य की रोशनी के चमकता है एवं चंद्रग्रहण व सूर्यग्रहण के रहस्यों को भी समझाया | विश्व पहली बार पाई का मान 3.1416 होता है, आर्यभट्ट ने ज्ञात किया तथा इन्होंने गणित के विभिन्न समीकरणों को  हल करने के तरीके भी बताये जिसे पूरे विश्व ने स्वीकार किया है |

इन्होंने आर्यभट्ट सिन्धातम नाम से एक पुस्कत भी लिखी जिसके कुछ फैक्ट इस प्रकार है –  

सूर्य से ग्रहों की दूरी को  Astronomical Unit में दर्शाया गया है | जो प्रथ्वी व सूर्य के बीच की औसत दूरी है |
11 Astronomical Unit = 149 597 871 kilometers

गृह का नाम   
आर्यभट्ट के अनुसार
(सूर्य से दूरी)
आधुनिक मत के अनुसार (सूर्य से दूरी)
Mercury
0.375
0.387
Venus
0.725
0.723
Mars
1.538
1.523
Jupiter
5.16
5.20
Saturn
9.41
9.54


विभिन्न ग्रहों का सूर्य के चारो ओर परिभ्रमण काल सिद्धांत –


गृह का नाम
आर्यभट्ट के अनुसार

आधुनिक मत के अनुसार
Earth
365.25787
365.256
Moon (satellite planet)
27.322 Day (orbit around Earth)
27.322 Day
Mars
1.881 Year
0.723
Jupiter
5.16
5.20
Saturn
9.41
9.54







हम जानते हैं, भारत ने सदा विश्व को सदा कुछ न कुछ दिया है | गणित के क्षेत्र में भारत का विश्व में बहुत योगदान रहा है | हम जानते हैं कि ‘0’ विश्व को भारत की देन है जिसका उल्लेख प्राचीनतम उल्लेख चंद्रा शास्त्र में मिलता है जिसे 200 BC में पिंगला ऋषि ने लिखा था |

संस्कृत के महा विद्वान गणिनी द्वारा रचित शास्त्रों में भी ‘0’ के लिए वैज्ञानिक कहत्ते है, कि रोमन व अरब सभ्यताओं ने शून्य के महत्व को भारत से लिया, पहले अरब लोगों ने इसे सीखा, फिर यूरोप को सिखाया | अलबरुनी (Al-Biruni) व अबुल अबुरहमान जिन्होंने 973 A.D.  में भारत की यात्रा की तथा भारतीय ज्ञान को अरब फिर यूरोप तक पहुचाया | Place value system भी भारत की देन है | 3000 B.C. से लेकर 12 A.D. तक गणित के क्षेत्र में भारत ने अमूल्य योगदान दिया | हड़प्पा एवं वैदिक काल में सुलभ सूत्र ज्यामिति (Geometry) तथा Pythagorean theorem ( Baudhyana theorem) का उपयोग triangle , equilateral triangle , right triangle की गणनाओं के काम आत्ती थी | 
बहुत सारे भारतीय गणतज्ञ जैसे Arybhata, Brahmagupta, Mahavira, Bhaskara II ने गणित के क्षेत्र में योगदान दिया | 
भारत में Srinivasa Ramanujan जैसे गणित के विद्वान हुए जिन्होंने ने स्नातक न होते हुए भी Cambridge University में पढ़ाया |  
Aryabhata, mathematician and astronomer in Ancient India.

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मुझे कई साल स्कूल में बिताने, मम्मी-पापा और मास्टर जी की मार खाने के बाद भी मुझे ठीक से पहाड़े याद नहीं हुए || पता नहीं आप लोगों को कितना कुछ करना पड़ा होगा और शायद आज बीस तक पहाड़े याद हो ..लेकिन अब आप चिंता न करे अब एक नया तरीका खोज के लाया हूँ जिससे आप पल भर में ही 20 तक ही नहीं बलकी 100 तक पहाड़े याद कर सकते है .. नीचे वीडियो देखे और अपने विचारो से हमें अवगत कराये|





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